Tejpal Singh Dhama

तेजपाल सिंह धामा

परिचय

तेजपाल सिंह धामा पत्रकार, हिन्दी के लेखक एवं सामाजिक कार्यकर्ता हैं। हमारी विरासत (शोध-ग्रंथ) उनकी प्रसिद्ध रचना है। इन्होंने हैदराबाद से प्रकाशित स्वतंत्र वार्ता एवं दिल्ली से प्रकाशित दैनिक विराट वैभव एवं दैनिक वीर अर्जुन के संपादक विभागों में दशकों तक कार्य किया। हिन्द पॉकेट बुक्स के आप 8 वर्ष तक चीफ एडिटर रहे, एवं पेंगुइन रेंडम हाउस इंडिया में कमिशनिंग एडिटर के रूप में भी अपनी सेवाएं दी।

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के खेकड़ा शहर में 2 जनवरी 1971 को जन्मे तेजपाल सिंह धामा मुख्यत: इतिहास पर लिखने वाले साहित्यकार हैं जिनकी इतिहास से सम्बन्धित अनेक पुस्तकें छप चुकी हैं। लेखन व समाज सेवा के लिए इन्हें अनेक साहित्यिक एवं सामाजिक पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं। शहीदों पर लिखने के कारण इन्हें 2017 में संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार ने संस्कृति मनीषी पुरस्कार से सम्मानित किया, जिसमें डेढ लाख रुपए की नगद राशि एवं प्रशिस्त पत्र प्रदान किए जाते हैं।

अब तक उनके 45 ऐतिहासिक उपन्यास, 5 काव्य संग्रह, 1 महाकाव्य और विविध विषयों की कुछ अन्य पुस्तकें छप चुकी चुकी हैं। उनकी प्रथम काव्य रचना आँधी और तूफान बच्चों के साथ-साथ बड़ों में भी अत्यन्त लोकप्रिय हुई। तत्पश्चात् उन्होंने एक उपन्यास शान्ति मठ लिखा, जो एक सम्पादक को इतना पसन्द आया कि उन्होंने अपने साप्ताहिक पत्र में उसे श्रृंखलाबद्ध प्रकाशित किया। गायत्री कमलेश्वर के अनुरोध पर प्रख्यात लेखक कमलेश्वर की अंतिम एवं अधूरी पुस्तक इन्होंने ही पूरी की, जो हिन्द पाकेट बुक्स से ‘अंतिम सफर’ के नाम से प्रकाशित हुई और बेस्ट सैलर रही। इन्होंने राजस्थान की दस प्रमुख रानियों पर खोजपरक उपन्यासों की एक श्रृंखला भी लिखी है, जिसमें रानी पद्मिनी पर अग्नि की लपटें, रानी कर्मदेवी पर अजेय अग्नि, रानी चंपा पर ठंडी अग्नि इत्यादि हैं। इनकी ये पुस्तकें देशभर खासकर राजस्थान में काफी चर्चित रही हैं। इनकी अग्नि की लपटें उपन्यास पर संजय लीला भंसाली ने अपनी चर्चित फिल्म ‘पदमावत’ का निर्माण किया है।

आपने डोमिनीक लापिएर एवं लैरी कॉलिन्स समेत कई चर्चित विदेशी लेखकों की इतिहास से संबद्ध पुस्तकों का हिन्दी अनुवाद भी किया।

दुर्व्यसन, अस्पृश्यता, पशु पक्षी हत्या, परावलम्बन और प्रकृति के साथ छेड़छाड़ – ये कुछ ऐसी बुराइयाँ हैं जिनके कारण सम्पूर्ण समाज को आर्थिक, सामाजिक व प्राकृतिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। समाज में व्याप्त इन व्याधियों को जड़ से मिटाने के लिये तेजपाल सिंह धामा ने समाज सेवा को ही अपना मुख्य ध्येय बनाया।

श्री धामा भारतीय कला एवं संस्कृति में गहरी आस्था रखते हैं, लेकिन जब हुसैन की एक पेंटिंग में भारत के मानचित्र पर एक नग्न महिला बनाई गई, जिस महिला के पूरे जिस्म पर भारत के राज्यों के नाम थे। तो इसके बाद उनके खिलाफ हिंदूवादी संगठनों का गुस्सा भड़क गया था। इसी विषय पर उन्हें पत्रकार तेजपाल सिंह धामा के विरोध का भी सामना करना पड़ा था। मकबूल फिदा हुसैन ने हैदराबाद में एक पत्रकार वार्ता आयोजित की, जिसमें धामा भी मौजूद थे। धामा ने पत्रकार वार्ता में हुसैन से उनकी भारत माता की विवादित पेंटिंग को लेकर सवाल जवाब किए और बात इससे कहीं ज्यादा बढ़ गई और दोनों के बीच हाथापाई हो गई। हुसैन को उन्होंने एक चांटा जड़ दिया, जिसको हिन्दूवादी संगठनों ने सही ठहराया और मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में तेजपाल सिंह धामा को हुसैन को सबक सिखाने के लिए सम्मानित किया गया और उन्हें सन आॅफ आर्यवर्त की उपाधि दी गई।

कृषि विज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने वाले धामा जाति प्रथा के नाम पर फैलाई जा रही कुरीतियों के घोर विरोधी हैं। उन्होंने स्वयं भी अन्तर्जातीय विवाह किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने बच्चों के लिये वैदिक बाल संस्था और युवाओं के लिये युवा विकास परिषद जैसी स्वयंसेवी संस्थाओं की स्थापना की। युवा विकास परिषद् के माध्यम से उन्होंने दुर्व्यसन, पशु पक्षी संरक्षण व अस्पृश्यता मुक्ति जैसे आन्दोलन भी चलाये हैं।