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वै​दिक संगम के बारे में


वेदों में कहा गया है-

ऋषयः मन्त्र द्रष्टाराः कवयः क्रान्तदर्शिनाः

अर्थात् ऋषि मन्त्रद्रष्टा और कवि क्रान्तदर्शी होते हैं। इसी वेद विचार को ध्यान में रखते हुए हमने ऐसी रचनाएं प्रकाशित करने की शुरूआत की है, जो उज्ज्वल संस्कार उत्पन्न करे एवं देश को जोड़ने की बात करें तोड़ने की नहीं। भारत की जनता में सादगी, सच्चरित्रता, सच्चाई, समाजसेवा व सच्ची देशभक्ति की आस्था जागृत हो। हम नहीं कहते कि राजनैतिक या सस्ता मनोरंजन करने वाली रचनाएँ अच्छी नहीं होती, लेकिन हमारे विचार में सबसे अच्छी बात भारत की सभ्यता, संस्कृति, सामाजिकता, विश्वबन्धुत्व, एकता व अखण्डता हेतु रचनाकारों को प्रोत्साहित करना व ऐसी रचनाएं प्रकाशित करने की चुनौती को स्वीकार करना है।

साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं पथ प्रदर्शक भी होता है। इसलिए हमने वैदिक संगम की छत्रछाया में जन चेतना के श्रेष्ठ सजग सांस्कृतिक अभियान के तहत ऐसा साहित्य प्रकाशित करने का निर्णय लिया है, जिसके पढ़ने से बच्चों, किशोरों, युवकों व प्रोढ़ों में नैतिकता आए, चरित्र निर्माण व देशभक्ति का संचार हो।

नैतिकता, चरित्र निर्माण व देशभक्ति बिना ज्ञान के संभव नहीं है, क्योंकि महर्षि मनु ने मनुस्मृति 5.109 में हमें बताया है- “विद्यातपोभ्याम् भूतात्मा, बुद्धिर्ज्ञानेन शुध्यति” अर्थात् “विद्या एवं तप से जीवात्मा पवित्र होती है, और बुद्धि ज्ञान से पवित्र होती है।

महर्षि कपिल सांख्य-दर्शन 3.23 में लिखते हैं, कि ज्ञान के बिना मुक्ति नहीं होती, अज्ञानता से बन्धन होता है।

महर्षि वेदव्यास ने गीता 4.38 में कहा है- “न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते” अर्थात् “ज्ञान के सदृश पवित्र वस्तु संसार में दूसरी नहीं है।”  ज्ञान से मनोगत कालुष्य मिटता है तथा बुद्धि निर्मल होती है। निर्मल बुद्धि से ही मनुष्य सदाचरण में प्रवृत्त होता है।

जब हरेक भरतवंशी ज्ञानी होगा, तभी संसार में शिष्टाचार फैलेगा और आर्यो के अनुशासन, शिष्टाचार, त्यागभावना व समाज सेवा से ही संसार में भारत का गौरव बढ़ेगा और हमारा यह देश पारसमणि बनकर जगतगुरु का परम पद दोबारा अवश्य प्राप्त कर सकता है।

वैदिक संगम का मुख्य उद्देश्य आर्ष-ग्रन्थों, उत्कृष्ट हिन्दी साहित्य और भारतीय कला एवं वैदिक संस्कृति का विभिन्न प्रकार से प्रचार-प्रसार करना है। इसके अन्तर्गत आर्ष-पुस्तकों एवं प्रख्यात साहित्यकारों की रचनाओं को न्यूनतम सम्भावित मूल्य पर पाठकों को उपलब्ध कराना, उत्कृष्ट पुस्तकों का digitization, संस्कृत-भाषा की निःशुल्क शिक्षा, दुर्लभ ग्रन्थों को प्रकाशित कराना, श्रेष्ठ हिन्दी कहानियों एवं महान पुरुषों के जीवन पर नाटक एवं फिल्मों का निर्माण करना एवं विद्वानों के लेखों से शंकाओं का निवारण आदि कार्य हैं। स्वामी दयानंद सरस्वती जी के जीवन पर एक भव्य फिल्म निर्माण की भी हमारी योजना है।सत्यार्थ प्रकाश के प्रभाव पर आधा​रित फिल्म सन आॅफ आर्यवर्त निर्माणाधीन है।

इस ईश्वरीय कार्य में आप सभी धनी एवं विद्वानों का तन-मन-धन से सहयोग अपेक्षित है। हमारी योजना निकट भविष्य में विभिन्न भाषाओं में पवित्र वेदों के निःशुल्क वितरण की है, इस हेतु प्रारम्भ में वेदों को न्यूनतम मूल्य पर पाठकों को उपलब्ध कराया जा रहा है। वेदों के साथ वेदार्थ में सहायक ग्रन्थ ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका और सत्यार्थ-प्रकाश के वितरण की योजना तो हम सालों से चला ही रहे हैं।

इस वेबसाइट vedicsangam.com पर वेदादि आर्ष-ग्रन्थों एवं संस्कारवान प्रेरणाप्रद हिन्दी साहित्य पर आधारित सामग्रियों को शब्द (Text), चित्र (Picture), रेखाचित्र (Sketch), श्रव्य (Audio), चलचित्र (Video), प्रदर्शन (Presentation), लेखाचित्र (Infographics) आदि के रूप में प्राप्त किया जा सकता है।

वैदिक संगम की संस्थापिका मुस्लिम परिवार में जन्मी फहराना ताज हैं, जो पवित्र वेदों के प्रचार—प्रसार में आस्था रखती हैं।